पालकी में निकले तीर्थंकर पार्श्वनाथ

निराशा और नकारात्मकता के भाव को त्यागना जरूरी है। जीवन में उत्साह उमंग और सकारात्मकता जरूरी है, जीवन को ऐसे जीवन की हर दिन उत्सव समान हो तब जाकर मृत्यु महोत्सव बन जाएगी। एकाग्रता और शांत चित के साथ स्वभाव को निर्मल रखें तो जीवन आसान हो जाएगा। यह विचार मातृहृदया पूज्य अमितगुणाश्रीजी महाराज सा ने श्वेतांबर जैन समाज के द्वारा भगवान पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक उत्सव में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। श्री धरणीधर पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट एवं श्री संघ के द्वारा आयोजित जन्म कल्याणक महोत्सव में देश के कई प्रमुख शहरों से श्वेतांबर जैन समाज जन आज इस आयोजन में शामिल हुए। पुंडरीक पालरेचा और पीयूष भाई संघवी ने बताया कि कड़ाके की सर्दी में सुबह सैकड़ो समाज जन भगवान पार्श्वनाथ के बाल स्वरूप को पालकी में लेकर निकले। इंद्र इंद्राणी और देवी देवताओं की मनमोहन वेश धारण कर नृत्य गान करते हुए उत्सव मनाया हाईलिंक सिटी के प्रमुख मार्गों पर पालकी यात्रा निकली। श्री संघ के 50 युवा पालकी को बारी-बारी से उठा रहे थे। सैकड़ो समाजजन इसमें शामिल हुए। इस अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ के मंदिर के समीप साधु साध्वी भगवंत के रुकने के लिए उपाश्रय निर्माण की घोषणा की गई। सभी समाज जन एवं ट्रस्ट की ओर से भूमि पूजन के लिए 18 जनवरी और शिलान्यास के लिए 23 जनवरी को करने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रीतेश औसतवाल, वीरेंद्र गुप्ता, सुरेश लोढ़ा, अनिल महाराज, दिलीप खिमेसरा आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए। संचालन शेखर गेलड़ा और शैलिन जैन ने किया आभार शांतू पालरेचा ने माना।

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