
बिजली अधिकारियों का प्रमुख कार्य सुचारू रूप से विद्युत सेवा देना और समय पर राजस्व संग्रहण करना हैं। बिजली वितरण कंपनी के कार्यपालन यंत्री यानि डीई अपने क्षेत्र के लिए संपूर्ण अधिकारिता रखते हैं। जिन क्षेत्रों का परफॉर्मेंस खराब है, वह मार्च तक सुधार लाएं। खराब परफॉर्मेंस वाले क्षेत्रों की हर सप्ताह एसई और सीई समीक्षा भी करें। मध्यप्रदेश ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव श्री संजय दुबे ने ये निर्देश दिए। श्री दुबे ने मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की समीक्षा बैठक में कहा कि मोटराइजेशन और गुणवत्तापूर्ण बिलिंग समय पर हो, रीडिंग-बिलिंग ऐसी व्यवस्थित हो कि बिल में सुधार की नौबत हीं नहीं आए। उन्होंने कहा कि बिलिंग और कलेक्शन एफिशिएंसी में क्रमशः तीन माह सुधार लाएं, इससे मार्च में पूरे वित्तीय वर्ष की स्थिति में सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा। प्रमुख सचिव ने लाइन लॉस घटाने के लिए सभी जिलों के इंजीनियरों से समय पर कार्ययोजना का अक्षरशः पालन के लिए कहा। श्री दुबे ने कहा कि अवैध कॉलोनी में तय शुल्क लेकर विधिवत कनेक्शन प्रदान किए जाएं। प्रमुख सचिव ने उच्चदाब उपभोक्ताओं के पुराने बकाया मामलों एवं विवादों का उचित तरीके से निराकरण करने के निर्देश दिए ताकि पेंडेंसी खत्म हो। उन्होंने नियमानुसार नए सर्विस कनेक्शन हर हाल में तीन दिन के भीतर देने, उच्च दाब उपभोक्ताओं को त्वरित सेवाएं देने, आरडीएसएस के कार्य समय पर करने के भी निर्देश दिए। प्रमुख सचिव ने मैंटेनेंस व बिजली के विकास, नए कार्यों की गुणवत्ता पर पूरा फोकस करने को कहा ताकि ये कार्य हमारे लॉस घटाने और राजस्व उपभोक्ता संतुष्टि को बढ़ाने में कारगर साबित हो सके। श्री दुबे ने कहा कि विजिलेंस कार्रवाई की समस्त इंट्री एवं शुल्क निर्धारण की इंट्री मेन्यूअल के स्थान पर ऑन लाइन करने के निर्देश दिए। इससे पारदर्शिता रहेगी। पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अमित तोमर ने इस अवसर पर कंपनी क्षेत्र में उपभोक्ता सेवाओं, राजस्व संग्रहण, लॉस घटाने के प्रयासों की जानकारी दी। इस अवसर पर ऊर्जा विभाग के ओएसडी श्री वीके गौड़, श्री वीरेंद्र भार्गव, कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक श्री रिंकेश कुमार वैश्य, निदेशक श्री पुनीत दुबे, श्री सचिन तालेवार, कार्यपालक निदेशक श्री गजरा मेहता, मुख्य अभियंता श्री एसएल करवाड़िया, श्री रवि मिश्रा,श्री एसआर बमनके, शहर अधीक्षण यंत्री श्री मनोज शर्मा, ग्रामीण अधीक्षण यंत्री डॉ.डी.एन. शर्मा आदि मौजूद थे।
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