संपूर्ण भारत की संस्कृति प्रस्तुतियों के माध्यम से उतर आई मालवा उत्सव में

युवक युवतियों के समूह अपनी मस्ती में मस्त, मस्ती से इधर-उधर शिल्प देखते हुए तो कुछ समय के लिए मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में तालियां बजाते हुए, छोटे-छोटे बच्चे ऊंट पर सवारी करके आनंद लेते हुए, झूला झूलना और मालवी व्यंजनों का लजीज स्वाद तो उत्सवी माहौल का गुणगान करते इंदौरी लहजे में भैया नमस्ते कह कर आगे बढ़ते कला प्रेमियों के समूह मालवा उत्सव में अपनी कला प्रियता को दर्शाते हुए दिखाई दे रहे हैं। लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया की शिल्प बाजार में नागालैंड से नारोला नेकलेस फ्लावर स्टोल आदि लेकर मालवा उत्सव में आई है वही उत्तर प्रदेश से हैंडलूम की बेडशीट लेकर आस मोहम्मद आए हैं। डिंडोरी मध्य प्रदेश से गोंड पेंटिंग जिसे हाथ से बनाने में करीब 3 से 5 दिन लगते हैं लेकर रजनी धुर्वे, सूरज सुकर्मा आदि आए हैं। थाईलैंड युगांडा विदेश से भी शिल्पकार यहां पर आए हैं । फरीदाबाद एवं भोपाल से टेराकोटा का विशाल संग्रह जिसमें कछुआ फ्लावर पॉट बुद्धा आदि आए हैं। पश्चिम बंगाल से जहां हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग की बेडशीट, जूट के बैग आए हैं तो टीकमगढ़ का प्रसिद्ध ब्रास शिल्प मालवा उत्सव में अपनी कला बिखेरने आया है। वही पीतल शिल्प, लौह शिल्प, पोचमपल्ली साड़ियां, महेश्वरी साड़ियां, गलीचा, ड्राई फ्लावर, बांस शिल्प, केन फर्नीचर सहित अनेकों आइटम यहां मौजूद है। लोक संस्कृति मंच के पवन शर्मा एवं संकल्प वर्मा, दमयंती भाटिया एवं शिष्यों द्वारा मां अहिल्याबाई नारी शक्ति के रूप मे आधारित नृत्य नाटिका में सेवा नेतृत्व एवं संघर्ष की गाथा को नृत्य के माध्यम से बताया गया। धर्म परंपरा और आधुनिकता के बीच में संतुलन बनाते हुए इसे दिखाया गया । पंजाब का प्रसिद्ध नृत्य भांगड़ा प्रस्तुत हुआ जिसमें खंडे, कलमुझी, तुम्बी, ढोल आदि की सहायता से शानदार नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं गुजरात का प्राचीन गरबा भी खूबसूरती के साथ प्रस्तुत हुआ। डिंडोरी से आए कलाकार द्वारा धोती कुर्ता एवं कौड़ियों की माला पहनकर गुडूम बाजा नृत्य प्रस्तुत किया गया वहीं गुजरात के डांगी जिले से आए हुए कलाकारों ने खांडवा, नथ एवं साड़ी पहनकर लड़कियों ने तो धोती और कमीज पहनकर लड़कों ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। निमाड़ का गणगौर बहुत ही सुंदर प्रस्तुति रही “बोल थे अरे साएबा खेलन गई गणगौर”। “गल का लाइए हो तबीज नजर का तांगा लाईए” बोल पर हरियाणवी फाग डांस प्रस्तुत किया गया यह फागण मास में जब फसल पक जाती है तो उसे समय खुशी में घरवाली अपने पति से फरमाइश करते समय जो कहती है उसको प्रस्तुत किया गया। स्मृति आदित्य एवं शिष्यों द्वारा रक्तबीज वध को बहुत ही सुंदरता के साथ नृत्य के माध्यम से दर्शाया गया। वीर नाट्यम की भी प्रस्तुति भी हुई। कला शिविर में शुभा वैद्य, नारायण पाटीदार, आलोक शर्मा, धीरेंद्र मांडगे, जयप्रकाश चौहान, विनीता शर्मा जैसे ख्यात चित्रकारों ने अपनी मन की भावनाओं को चित्रों के माध्यम से इस कला शिविर में व्यक्त किया।

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