भाजपा सरकार पुराने मॉडल को क्यों थोप रही है ? कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे का सवाल

मध्यप्रदेश सरकार इंदौर-भोपाल के लिए मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी एक्ट लाने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य शहर के नियोजन, परिवहन और विकास कार्यों का केंद्रीकृत संचालन करना है लेकिन वैश्विक विशेषज्ञों और शहरी नीति विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ‘ओल्ड स्कूल ऑफ थॉट’ की वापसी की तरह है, एक ऐसा मॉडल जो आज की तेज़ी से बदलती शहरी ज़रूरतों के साथ तालमेल नहीं बैठाता।

केंद्रीकृत सत्ता बनाम सहभागी शासन

मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी की संरचना एक केंद्रित प्रशासनिक ढांचे पर आधारित होती है, जिसमें निर्णय लेने की शक्ति एक ही संस्था में निहित रहती है। जबकि आज के दौर में शहरी प्रशासन का रुझान विकेंद्रीकरण, जन भागीदारी और साझा निर्णय प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह नया एक्ट एक पुराने, अप्रासंगिक ढांचे को संस्थागत रूप देने जैसा माना है।

जटिलता को एक संस्था कैसे सुलझाएगी ?

आज इंदौर-भोपाल जैसे शहरों को जलवायु परिवर्तन, ट्रैफिक, जल संकट, और आवास जैसे बहु-आयामी मुद्दों से जूझना पड़ता है। इनका समाधान मल्टी-सेक्टरल कोलैबोरेशन, इंटर-एजेंसी समन्वय, और सामुदायिक भागीदारी से ही संभव है, न कि किसी एकल संस्था के केंद्रीकृत निर्णयों से।

वैश्विक ट्रेंड्स के उलट कदम ?

जहां दुनिया भर में पॉलीसेंट्रिक (polycentric) और नेटवर्क आधारित गवर्नेंस को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं इंदौर-भोपाल मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी एक्ट एक रेट्रोस्पेक्टिव अप्रोच को दर्शाता है। यह न सिर्फ वैश्विक ट्रेंड्स से विपरीत है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुकूल भी नहीं लगता।

पुराने थके हुए ढांचे की वापसी या भविष्य की अनदेखी ?

मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी एक्ट का उद्देश्य चाहे बेहतर समन्वय हो, लेकिन इसके जरिए यदि एक Centralized सुपर-बॉडी बनाई जाती है, तो यह इंदौर जैसे जीवंत और नवाचारशील शहर के लिए एक कदम पीछे होगा। वक्त की मांग है कि सरकार ऐसे किसी भी एक्ट को लाते समय स्थानीय नागरिकों, विशेषज्ञों और संस्थाओं की राय शामिल करे, ताकि निर्णय जन-केंद्रित और समावेशी हो। इंदौर-भोपाल में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट, Sustainable, समावेशी (Inclusive) और लचीला (Resilient) शहर बनाना है जो पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज के सभी वर्गों की जरूरतों को पूरा कर सके। कांग्रेस जल्द ही एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित कर अपना विस्तृत प्लान देगी।

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