पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए इंदौर में दाह संस्कार की प्रक्रिया के लिए हाईटेक मशीन का उपयोग किया जाने लगा है। इंदौर के जूनी इंदौर मुक्तिधाम में दूसरी मशीन लगाई गई जिसे स्वर्गारोहण मशीन नाम दिया गया है। पहली मशीन रामबाग मुक्तिधाम में लगाई गई है। इस मशीन में दाह संस्कार करने में बेहद कम लकड़ी का उपयोग होता है। सामान्य रूप से दाह संस्कार में 300 किलो से लकड़ी लगती है और इसमें तीन से चार पेड़ नष्ट हो जाते हैं। वहीं इस मशीन में 80 से 100 किलो लकड़ी लगती है। यह Save Tree विचार को मजबूती देगी। इस मशीन में लकड़ी या कंडे की एक तिहाई मात्रा से शवदाह की प्रक्रिया की जा सकती है। स्वर्गारोहण की पहली इकाई तीन माह पूर्व महाराष्ट्रीयन समाज द्वारा रामबाग मुक्तिधाम पर शुरू की गई थी। दूसरी इकाई जूनी इंदौर मुक्तिधाम में स्थापित कर उसमें एक शव का धार्मिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। मशीन का डिजाइन इस तरह का है कि इसमें शव के आसपास बहुत कम लकड़ी लगती है। खुले में दाह संस्कार करने से बहुत अधिक लकड़ी लगती है और धुआं और कार्बन डाइऑक्साइड भी बहुत अधिक होता है। इसमें मोक्ष लकड़ी/बायो कोल/गौकाष्ठ/कंडे का उपयोग भी कर सकते हैं। सामान्य शास्त्रोक्त विधि, जैसे-कपाल क्रिया, घी लगाना, मुखाग्नि देना, सब कर सकते हैं। लकड़ी तीन गुना कम लगने से कार्बन डाय आक्साइड का उत्सर्जन, राख व धुंआ भी तीन गुना कम होता है वहीं दाह संस्कार मात्र डेढ़-दो घंटे में पूर्ण हो जाता है। इसके बाद में अस्थि एवं राख नीचे रखी ट्रे में सुरक्षित प्राप्त हो जाती है।
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