
इंदौर स्मार्ट सिटी डेव्हलपमेंट लिमिटेड की शहर स्तरीय परामर्श समिति की बैठक आज सांसद श्री शंकर लालवानी की अध्यक्षता में स्मार्ट सिटी कार्यालय के सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक में महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर श्री आशीष सिंह, आयुक्त नगर निगम श्री शिवम वर्मा एवं अन्य समिति के सदस्य उपस्थित थे। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, स्मार्ट सिटी डेव्हलपमेंट लिमिटेड श्री दिव्यांक सिंह द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत प्रगतिरत एवं प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं के संबंध में जानकारी दी गई। उन्होंने जलूद में निर्माण किये जा रहे 60 मेगावाट क्षमता के सौर उर्जा संयंत्र की अद्यतन स्थिति के बारे में अवगत कराते हुए बताया गया कि उक्त प्लांट जुलाई-2025 तक पूर्ण होकर संचालन प्रारंभ हो जायेगा।
बैठक में राजवाड़ा पैलेस-गोपाल मंदिर के आस-पास के क्षेत्र को पेडेस्ट्रियल जोन बनाने के संबंध में चर्चा उपरांत समिति द्वारा विस्तृत एवं फिजेबल प्रस्ताव तैयार करने के सुझाव दिये गये। स्मार्ट सिटी कंपनी को अंतरित दो भूखंडों के मुद्रीकरण के संदर्भ में चर्चा के दौरान समिति को अवगत कराया गया कि भूखंड-1, ओल्ड गर्वमेंट क्वार्टस के चिन्हित क्षेत्रों में अतिक्रमण को हटाने का कार्य किया जाना एवं भूखंड-2 में कुक्कुट पालन केंद्र की निविदा लाईव होकर भूखंड में स्थित वेटरनरी विभाग की संरचनाओं को प्रस्तावित एम.आर.-6 रोड़ की दूसरी तरफ शिफ्ट किया जाना प्रस्तावित है।
एम.ओ.जी.लाईन भूखंड-2 से प्राप्त होने वाली आय के संबंध में प्रस्तावित कार्यों के विषय में विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें मास्टर प्लान के विभिन्न रोड़ का निर्माण किये जाने के संबंध में बताया गया। इस विषय में समिति द्वारा सुझाव दिया गया कि उक्त आय का उपयोग करने हेतु शहर हित के लिये स्मार्ट लायब्रेरी एवं अन्य समान प्रकल्पों का प्रस्ताव तैयार किया जाये। स्मार्ट सिटी के सस्टेनिबिलिटी इनीशीऐटिव के अंतर्गत नामिनेशन बेस्ड वर्क किये जाने के विषय में चर्चा की गई। इस संबंध में समिति द्वारा अर्बन प्लानर, आर्किटेक्ट एवं अन्य विशेष सलाहकारों के इम्पेनलमेंट किया जाकर एक समग्र टीम बनाने का सुझाव दिया गया, जिससे इस टीम के माध्यम से शहर हित के विभिन्न कार्य सुगमता से संचालित किये जा सकें। स्मार्ट सिटी द्वारा पूर्ण किये गये विभिन्न कार्य जैसे-गांधी हॉल, गोपाल मंदिर, मराठी कला संकुल तथा राजवाड़ा आदि के संबंध में ऐडप्टिव रीयूज तथा इनके संचालन/संधारण के संबध में विस्तृत चर्चा की गई तथा सुझाव दिये गये।
